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शिशॠको पहले छह महीने तक केवल सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ पर ही निरà¥à¤à¤° रखना चाहिà¤à¥¤ यह शिशॠके जीवन के लिठजरूरी है, कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि मां का दूध सà¥à¤ªà¤¾à¤šà¥à¤¯ होता है और इससे पेट की गड़बड़ियों की आशंका नहीं होती। मां का दूध शिशॠकी पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤°à¥‹à¤§à¤• कà¥à¤·à¤®à¤¤à¤¾ बढ़ाने में à¤à¥€ सहायक होता है।
माà¤à¤ दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ अपने शिशॠको अपने सà¥à¤¤à¤¨à¥‹à¤‚ से आने वाला पà¥à¤°à¤¾à¤•ृतिक दूध पिलाने की कà¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ को सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ कहते हैं। यह सà¤à¥€ सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤‡à¤¯à¥‹à¤‚ में आम कà¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ होती है। सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ शिशॠके लिठसंरकà¥à¤·à¤£ और संवरà¥à¤§à¤¨ का काम करता है। नवजात शिशॠमें रोग पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤°à¥‹à¤§à¤¾à¤¤à¥à¤®à¤• शकà¥à¤¤à¤¿ नहीं होती। माà¤à¤ के दूध से यह शकà¥à¤¤à¤¿ शिशॠको पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤ होती है। माà¤à¤ के दूध में लेकà¥à¤Ÿà¥‹à¤«à¥‹à¤°à¥à¤®à¤¿à¤¨ नामक ततà¥à¤µ होता है, जो बचà¥à¤šà¥‡ की आंत में लौह ततà¥à¤¤à¥à¤µ को बांध लेता है और लौह ततà¥à¤¤à¥à¤µ के अà¤à¤¾à¤µ में शिशॠकी आंत में रोगाणॠपनप नहीं पाते।[1] माà¤à¤ के दूध से आठसाधारण जीवाणॠबचà¥à¤šà¥‡ की आà¤à¤¤ में पनपते हैं और रोगाणà¥à¤“ं से पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¸à¥à¤ªà¤°à¥à¤§à¤¾ कर उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ पनपने नहीं देते। माà¤à¤ के दूध में रोगाणॠनाशक ततà¥à¤¤à¥à¤µ होते हैं। वातावरण से मां की आंत में पहà¥à¤‚चे रोगाणà¥, आंत में सà¥à¤¥à¤¿à¤¤ विशेष à¤à¤¾à¤— के संपरà¥à¤• में आते हैं, जो उन रोगाणà¥-विशेष के खिलाफ पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤°à¥‹à¤§à¤¾à¤¤à¥à¤®à¤• ततà¥à¤µ बनाते हैं। ये ततà¥à¤µ à¤à¤• विशेष नलिका थोरासिक डकà¥à¤Ÿ से सीधे माà¤à¤ के सà¥à¤¤à¤¨ तक पहà¥à¤‚चते हैं और दूध से बचà¥à¤šà¥‡ के पेट में। इस तरह बचà¥à¤šà¤¾ माà¤à¤ का दूध पीकर सदा सà¥à¤µà¤¸à¥à¤¥ रहता है।
अनà¥à¤®à¤¾à¤¨ के अनà¥à¤¸à¤¾à¤° 820,000 बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ की मौत विशà¥à¤µ सà¥à¤¤à¤° पर पांच साल की उमà¥à¤° के तहत वृदà¥à¤§à¤¿ हà¥à¤ˆ जिसे सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ के साथ हर साल रोका जा सकता है। दोनों विकासशील और विकसित देशों में सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ से शà¥à¤µà¤¸à¤¨ तंतà¥à¤° में संकà¥à¤°à¤®à¤£ और दसà¥à¤¤ के जोखिम को कमी पाई गयी है। सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ से संजà¥à¤žà¤¾à¤¨à¤¾à¤¤à¥à¤®à¤• विकास में सà¥à¤§à¤¾à¤° और वयसà¥à¤•ता में मोटापे का खतरा कम हो सकती है।
जिन बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को बचपन में परà¥à¤¯à¤¾à¤ªà¥à¤¤ रूप से मां का दूध पीने को नहीं मिलता, उनमें बचपन में शà¥à¤°à¥‚ होने वाले डायबिटीज की बीमारी अधिक होती है। उनमें अपेकà¥à¤·à¤¾à¤•ृत बà¥à¤¦à¥à¤§à¤¿ विकास कम होता है। अगर बचà¥à¤šà¤¾ समय पूरà¥à¤µ जनà¥à¤®à¤¾ (पà¥à¤°à¥€à¤®à¥‡à¤šà¥à¤¯à¥‹à¤°) हो, तो उसे बड़ी आंत का घातक रोग, नेकà¥à¤°à¥‹à¤Ÿà¤¾à¤‡à¤œà¤¿à¤‚ग à¤à¤‚टोरोकोलाइटिस हो सकता है। अगर गाय का दूध पीतल के बरà¥à¤¤à¤¨ में उबाल कर दिया गया हो, तो उसे लीवर का रोग इंडियन चाइलà¥à¤¡à¤¹à¥à¤¡ सिरोसिस हो सकता है। इसलिठछह-आठमहीने तक बचà¥à¤šà¥‡ के लिठमां का दूध शà¥à¤°à¥‡à¤·à¥à¤ ही नहीं, जीवन रकà¥à¤·à¤• à¤à¥€ होता है।
सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ के लाà¤:
मां का दूध केवल पोषण ही नहीं, जीवन की धारा है। इससे मां और बचà¥à¤šà¥‡ के सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯ पर सकारातà¥à¤®à¤• पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µ पड़ता है। शिशॠको पहले छह महीने तक केवल सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ पर ही निरà¥à¤à¤° रखना चाहिà¤à¥¤ यह शिशॠके जीवन के लिठजरूरी है, कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि मां का दूध सà¥à¤ªà¤¾à¤šà¥à¤¯ होता है और इससे पेट की गड़बड़ियों की आशंका नहीं होती। मां का दूध शिशॠकी पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤°à¥‹à¤§à¤• कà¥à¤·à¤®à¤¤à¤¾ बढ़ाने में à¤à¥€ सहायक होता है। सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ से दमा और कान की बीमारी पर नियंतà¥à¤°à¤£ कायम होता है, कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि मां का दूध शिशॠकी नाक और गले में पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤°à¥‹à¤§à¥€ तà¥à¤µà¤šà¤¾ बना देता है। कà¥à¤› शिशॠको गाय के दूध से à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ हो सकती है। इसके विपरीत मां का दूध शत-पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¶à¤¤ सà¥à¤°à¤•à¥à¤·à¤¿à¤¤ है। शोध से पà¥à¤°à¤®à¤¾à¤£à¤¿à¤¤ हà¥à¤† है कि सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ करनेवाले बचà¥à¤šà¥‡ बाद में मोटे नहीं होते। यह शायद इस वजह से होता है कि उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ शà¥à¤°à¥‚ से ही जरूरत से अधिक खाने की आदत नहीं पड़ती। सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ से जीवन के बाद के चरणों में रकà¥à¤¤ कैंसर, मधà¥à¤®à¥‡à¤¹ और उचà¥à¤š रकà¥à¤¤à¤šà¤¾à¤ª का खतरा कम हो जाता है। सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ से शिशॠकी बौदà¥à¤§à¤¿à¤• कà¥à¤·à¤®à¤¤à¤¾ à¤à¥€ बढ़ती है। इसका कारण यह है कि सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ करानेवाली मां और उसके शिशॠके बीच à¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾à¤¤à¥à¤®à¤• रिशà¥à¤¤à¤¾ बहà¥à¤¤ मजबूत होता है। इसके अलावा मां के दूध में कई पà¥à¤°à¤•ार के पà¥à¤°à¤¾à¤•ृतिक रसायन à¤à¥€ मौजूद होते हैं।
मां को सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ के लाà¤:
नयी माताओं दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ कराने से उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ के बाद होनेवाली शिकायतों से मà¥à¤•à¥à¤¤à¤¿ मिल जाती है। इससे तनाव कम होता है और पà¥à¤°à¤¸à¤µ के बाद होनेवाले रकà¥à¤¤à¤¸à¥à¤°à¤¾à¤µ पर नियंतà¥à¤°à¤£ पाया जा सकता है। मां के लिठदीरà¥à¤˜à¤•ालिक लाठहृदय रोग, और रà¥à¤®à¥‡à¤Ÿà¥€ गठिया का खतरा कम किया है। सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ करानेवाली माताओं को सà¥à¤¤à¤¨ या गरà¥à¤à¤¾à¤¶à¤¯ के कैंसर का खतरा नà¥à¤¯à¥‚नतम होता है। सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ à¤à¤• पà¥à¤°à¤¾à¤•ृतिक गरà¥à¤à¤¨à¤¿à¤°à¥‹à¤§à¤• है। सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ सà¥à¤µà¤¿à¤§à¤¾à¤œà¤¨à¤•, मà¥à¤«à¥à¤¤ (शिशॠको बाहर का दूध पिलाने के लिठदà¥à¤—à¥à¤§ मिशà¥à¤°à¤£, बोतल और अनà¥à¤¯ खरà¥à¤šà¥€à¤²à¥‡ सामान की जरूरत होती है) और सबसे बढ़ कर माठतथा शिशॠके बीच à¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾à¤¤à¥à¤®à¤• संबंध मजबूत करने का सà¥à¤²à¤ साधन है। मां के साथ शारीरिक रू प से जà¥à¤¡à¤¼à¥‡ होने का à¤à¤¹à¤¸à¤¾à¤¸ शिशà¥à¤“ं को आरामदायक माहौल देता है।
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